Hindi Meaning of Diarrhea: डायरिया (दस्त) का मतलब, लक्षण, कारण और इलाज
Diarrhea का हिंदी में मतलब है दस्त। मेडिकल किताबों और डॉक्टर की पर्ची में इसे अतिसार लिखा जाता है, और आम बोलचाल में लोग इसे लूज़ मोशन या पेट चलना कहते हैं। चारों शब्दों का मतलब एक ही है। तो hindi meaning of diarrhea ढूंढते हुए आप यहां पहुंचे हैं, और सीधा जवाब आपको पहली लाइन में मिल गया।
पर रुकिए। सिर्फ मतलब जानना काफी नहीं है।
दवा की पर्ची पर "acute diarrhea" लिखा हो, बच्चे की रिपोर्ट में "persistent diarrhea" आया हो, या किसी दवा के पत्ते पर "may cause diarrhea" छपा दिखे, तो हर बार इस शब्द का मतलब थोड़ा बदल जाता है। और यही वह जगह है जहां डिक्शनरी वाली वेबसाइटें हाथ खड़े कर देती हैं। वे शब्द का अनुवाद बता देती हैं, बीमारी नहीं समझातीं।
इस लेख में दोनों काम होंगे। शब्द का मतलब भी, और वह सब भी जो एक अस्पताल की टीम आपको आमने-सामने बैठकर समझाती: दस्त और पेचिश में फर्क, ORS घर पर बनाने का सही तरीका, बच्चों में दस्त कब खतरनाक हो जाता है, कौन सी दवा कब लेनी है और कब बिल्कुल नहीं, और अस्पताल जाने का सही समय क्या है।
Diarrhea का हिंदी में सही मतलब क्या है?
डॉक्टरी भाषा में diarrhea की परिभाषा साफ है: जब किसी व्यक्ति को दिन में तीन या उससे ज़्यादा बार पतला या पानी जैसा मल आए, तो उस स्थिति को डायरिया यानी दस्त कहते हैं।
यहां "पतला" शब्द अहम है। दिन में तीन बार सामान्य, बंधा हुआ मल आना दस्त नहीं है। कुछ लोगों का पेट स्वभाव से ही दिन में दो-तीन बार साफ होता है, और वह पूरी तरह सामान्य है। दस्त तभी है जब मल का पतलापन और बार-बार आना, दोनों साथ हों।
अंग्रेज़ी में इस शब्द की स्पेलिंग दो तरह से लिखी जाती है। अमेरिकी अंग्रेज़ी में diarrhea और ब्रिटिश अंग्रेज़ी में diarrhoea। दोनों सही हैं, मतलब एक ही है। भारत में स्कूली किताबें अक्सर ब्रिटिश स्पेलिंग रखती हैं और इंटरनेट पर अमेरिकी स्पेलिंग ज़्यादा चलती है, इसलिए दोनों दिखती रहती हैं। उच्चारण होता है डाय-रि-या (dai-uh-ree-uh)। लिखने में जितना उलझा हुआ, बोलने में उतना आसान।
दस्त, अतिसार और पेचिश – तीनों एक नहीं हैं
यह वह हिस्सा है जहां ज़्यादातर लोग, और सच कहें तो ज़्यादातर वेबसाइटें भी, गड़बड़ कर जाती हैं।
दस्त (Diarrhea): पतला, पानी जैसा मल, दिन में तीन से ज़्यादा बार। इसमें आमतौर पर खून नहीं आता।
अतिसार: दस्त का ही शुद्ध हिंदी और मेडिकल शब्द। सरकारी अस्पताल की पर्ची, आयुर्वेद की किताबें और हिंदी मेडिकल लिटरेचर में यही शब्द मिलेगा। Diarrhea = दस्त = अतिसार। तीनों में कोई अंतर नहीं।
पेचिश (Dysentery): यह अलग बीमारी है। पेचिश में मल के साथ खून या आंव (mucus) आता है, पेट में मरोड़ उठती है और बार-बार शौच जाने की तेज़ इच्छा होती है, भले ही कुछ न निकले। अंग्रेज़ी में इसे dysentery कहते हैं, diarrhea नहीं। किसी को खूनी दस्त हो रहे हों और वह उसे मामूली loose motion समझकर घरेलू नुस्खे आज़माता रहे, यही सबसे महंगी पड़ने वाली गलती है। खून दिखते ही डॉक्टर, उसी दिन।
लूज़ मोशन (Loose motion): यह कोई मेडिकल टर्म नहीं है। भारत में बोलचाल का शब्द है, जिसका मतलब दस्त ही होता है। तो अगर आप loose motion meaning in Hindi खोज रहे थे, जवाब वही है: दस्त। डॉक्टर से loose motion कहें या diarrhea, वह एक ही बात समझेंगे।
"Diarrhea" शब्द वाक्यों में – अंग्रेज़ी बोलते-लिखते समय कैसे इस्तेमाल करें
डॉक्टर से अंग्रेज़ी में बात करनी हो, छुट्टी की अर्ज़ी लिखनी हो या रिपोर्ट पढ़नी हो, ये वाक्य काम आएंगे:
- I have diarrhea. = मुझे दस्त लगे हैं।
- I am suffering from diarrhea since yesterday. = मुझे कल से दस्त हो रहे हैं।
- My son has loose motions and vomiting. = मेरे बेटे को दस्त और उल्टी हो रही है।
- The medicine may cause diarrhea. = इस दवा से दस्त हो सकते हैं। (दवा के पत्तों पर छपी यह लाइन साइड इफेक्ट की चेतावनी होती है, दवा बंद करने का आदेश नहीं। ऐसा हो तो डॉक्टर को बताएं।)
- Do not use during diarrhea. = दस्त के दौरान इस्तेमाल न करें। (कुछ दवाओं और सप्लीमेंट के लेबल पर लिखा होता है।)
- A bout of diarrhea = दस्त का दौरा, यानी दस्त का एक छोटा-सा दौर।
एक मज़ेदार शब्द और, जो लोग अक्सर खोजते हैं: verbal diarrhea meaning in Hindi। यह बीमारी नहीं, मुहावरा है। जो इंसान बिना रुके, बिना सोचे लगातार बोलता जाए, उसके लिए अंग्रेज़ी में मज़ाक में verbal diarrhea कहा जाता है। हिंदी में कहें तो बातों का दस्त। पेट से इसका कोई रिश्ता नहीं।
शरीर में दस्त होता कैसे है?
तीन लाइन में समझिए। आपकी आंत का काम है खाने और पीने से पानी सोखकर शरीर को देना। जब कोई संक्रमण, ज़हरीला तत्व या गड़बड़ी आंत की इस सोखने की क्षमता को बिगाड़ देती है, तो पानी मल के साथ बाहर निकलने लगता है। यही दस्त है।
इसीलिए दस्त में असली नुकसान बार-बार शौच जाने से नहीं, शरीर से निकलते पानी और नमक से होता है। और इसीलिए दस्त का असली इलाज दस्त "रोकना" नहीं, निकला हुआ पानी और नमक वापस पहुंचाना है। यह एक लाइन पकड़ लीजिए, आगे का पूरा लेख इसी पर टिका है।
Diarrhea से जुड़े ज़रूरी अंग्रेज़ी शब्द और उनके हिंदी मतलब
दस्त के इलाज के दौरान पर्ची, रिपोर्ट और दवा के पत्तों पर कुछ शब्द बार-बार आते हैं। इनके मतलब पहले से पता हों तो डॉक्टर की बात समझना आसान हो जाता है।
| Dehydration | निर्जलीकरण, शरीर में पानी की कमी। दस्त का असली खतरा यही है। |
| Stool | मल। "Stool test" या "stool routine" यानी मल की जांच। |
| Stool culture | मल में मौजूद जीवाणु की पहचान वाली जांच, जिससे पता चलता है कि कौन सा बैक्टीरिया परेशान कर रहा है। |
| ORS | जीवन रक्षक घोल। नमक, चीनी और पानी का वह घोल जो दस्त में निकला पानी और नमक लौटाता है। |
| Electrolytes | शरीर के ज़रूरी लवण, जैसे सोडियम और पोटैशियम, जो दस्त में तेज़ी से बह जाते हैं। |
| IV fluid / Drip | नस के ज़रिए चढ़ाया जाने वाला तरल। जब मरीज़ मुंह से पानी नहीं रख पाता, तब यही रास्ता बचता है। |
| Gastroenteritis | आंत्रशोथ, पेट और आंत का संक्रमण। दस्त और उल्टी साथ हों तो अक्सर यही निकलता है। बोलचाल में लोग इसे "गैस्ट्रो" भी कहते हैं। |
| Food poisoning | खराब या दूषित खाने से होने वाली बीमारी। |
| Antibiotic | जीवाणु मारने वाली दवा। हर दस्त में इसकी ज़रूरत नहीं होती। |
| Probiotic | अच्छे बैक्टीरिया वाले सप्लीमेंट या खाद्य, जो पेट का संतुलन लौटाने में मदद करते हैं। |
डायरिया के प्रकार – हर टाइप का हिंदी में मतलब
पर्ची या रिपोर्ट पर diarrhea अकेला नहीं लिखा होता। उसके आगे acute, chronic या severe जैसे शब्द जुड़े होते हैं, और हज़ारों लोग हर महीने इन्हीं का मतलब खोजते हैं। एक-एक करके।
Acute diarrhea meaning in Hindi – तीव्र दस्त
Acute का मतलब है अचानक शुरू होने वाला और कम समय तक रहने वाला। Acute diarrhea यानी ऐसे दस्त जो अचानक शुरू हों और 14 दिन से कम में ठीक हो जाएं। दस्त के ज़्यादातर मामले यही होते हैं। वजह आमतौर पर दूषित खाना-पानी या वायरल संक्रमण, और सही देखभाल से यह कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाता है।
Persistent diarrhea meaning in Hindi – लगातार बना रहने वाला दस्त
जो दस्त 14 दिन या उससे ज़्यादा खिंच जाएं, वे persistent diarrhea कहलाते हैं। दो हफ्ते की सीमा पार होते ही मामला "अपने आप ठीक हो जाएगा" वाली श्रेणी से बाहर निकल जाता है। जांच ज़रूरी हो जाती है, खासकर बच्चों में, क्योंकि लंबा दस्त बच्चे का पोषण खा जाता है।
Chronic diarrhea meaning in Hindi – दीर्घकालिक (पुराना) दस्त
Chronic यानी पुराना। चार हफ्ते से ज़्यादा चलने वाला दस्त chronic diarrhea है। इसके पीछे संक्रमण से बड़ी वजहें हो सकती हैं: आंत की सूजन, IBS, दूध न पचना, थायरॉइड की गड़बड़ी, या आंत की कोई और बीमारी। ऐसा दस्त घरेलू इलाज का विषय नहीं है। जांच पहले, इलाज बाद में।
Severe diarrhea meaning in Hindi – गंभीर दस्त
Severe यानी तेज़ या गंभीर। जब दस्त इतने ज़्यादा हों कि शरीर पानी की कमी की ओर बढ़ने लगे, कमजोरी, चक्कर या पेशाब कम आने लगे, तो उसे severe diarrhea कहा जाता है। यह घर पर संभालने वाली नहीं, अस्पताल पहुंचने वाली स्थिति है।
Mild diarrhea meaning in Hindi – हल्का दस्त
Mild यानी हल्का। दिन में तीन-चार बार पतला मल, पर पानी की कमी का कोई लक्षण नहीं, बुखार नहीं, खून नहीं। ऐसा दस्त आमतौर पर ORS, हल्के खाने और आराम से घर पर संभल जाता है।
Watery और bloody diarrhea – पानी जैसा बनाम खूनी दस्त
Watery diarrhea यानी बिल्कुल पानी जैसा मल। यह ज़्यादातर वायरल संक्रमण में होता है और इसी में निर्जलीकरण सबसे तेज़ी से होता है। Bloody diarrhea यानी खूनी दस्त, जो पेचिश या किसी गंभीर संक्रमण का इशारा है। खून दिखा, घरेलू इलाज बंद, सीधे डॉक्टर।
Traveler's diarrhea – यात्रा के दस्त
नई जगह का पानी और खाना, खासकर सड़क किनारे का, कई बार पेट को रास नहीं आता। यात्रा के दौरान या लौटने के तुरंत बाद शुरू होने वाले दस्त को traveler's diarrhea कहते हैं। बचाव सीधा है: सफर में बोतलबंद या उबला पानी, गर्म ताज़ा बना खाना, और खुले कटे फलों से दूरी।
Antibiotic-associated diarrhea – दवा से लगे दस्त
कुछ एंटीबायोटिक पेट के अच्छे बैक्टीरिया भी साफ कर देती हैं, जिससे दवा चलने के दौरान या खत्म होने के बाद दस्त शुरू हो जाते हैं। इसे antibiotic-associated diarrhea कहते हैं। ऐसा हो तो दवा अपने मन से बंद न करें, डॉक्टर को बताएं। वही तय करेंगे कि दवा बदलनी है, प्रोबायोटिक जोड़ना है या कुछ और।
Osmotic, secretory और nocturnal diarrhea – रिपोर्ट में दिखने वाले तीन और शब्द
ये शब्द आम मरीज़ को कम, गैस्ट्रो विशेषज्ञ की रिपोर्ट में ज़्यादा मिलते हैं। Osmotic diarrhea वह है जो किसी न पचने वाली चीज़ (जैसे दूध की शक्कर या कुछ मीठे सप्लीमेंट) के आंत में पानी खींच लेने से होता है; ऐसी चीज़ खाना बंद करते ही यह रुक जाता है। Secretory diarrhea में आंत खुद ज़रूरत से ज़्यादा पानी छोड़ने लगती है और भूखे रहने पर भी दस्त जारी रहते हैं। Nocturnal diarrhea यानी रात में नींद तोड़कर आने वाले दस्त; यह लक्षण डॉक्टर गंभीरता से लेते हैं क्योंकि यह अक्सर किसी अंदरूनी बीमारी की ओर इशारा करता है। तीनों में से कुछ भी आपकी रिपोर्ट में लिखा हो, तो समझिए मामला विशेषज्ञ के दायरे का है।
दस्त क्यों होते हैं – डायरिया के मुख्य कारण
OPD में मरीज़ों का सबसे आम सवाल यही होता है: "कल तक सब ठीक था, अचानक ये कैसे हो गया?" जवाब लगभग हमेशा पिछले एक-दो दिन के खाने-पीने में छिपा मिलता है।
- दूषित पानी और खाना। भारत में दस्त की सबसे बड़ी वजह। खुले में रखा खाना, बासी खाना, बिना ढका पानी, सड़क किनारे कटे फल, शादी-समारोह का घंटों रखा भोजन।
- वायरल संक्रमण। छोटे बच्चों में दस्त की सबसे आम वजह रोटावायरस है। बड़ों में नोरोवायरस जैसे वायरस पेट पकड़ते हैं। वायरल दस्त में एंटीबायोटिक काम नहीं करती, यह बात गांठ बांध लें।
- बैक्टीरिया। ई. कोलाई, साल्मोनेला, शिगेला जैसे जीवाणु दूषित खाने-पानी से पेट में पहुंचते हैं। शिगेला अक्सर पेचिश यानी खूनी दस्त की वजह बनता है।
- फूड पॉइज़निंग। खाने के कुछ घंटों के भीतर उल्टी और दस्त एक साथ शुरू हो जाएं, और वही खाना खाने वाले घर के दो-तीन लोग एक साथ बीमार पड़ें, तो food poisoning की आशंका सबसे ऊपर रहती है।
- एंटीबायोटिक और कुछ अन्य दवाएं। इसके अलावा कुछ एसिडिटी की दवाएं, कैंसर के इलाज की दवाएं और मैग्नीशियम वाले चूर्ण भी दस्त करा सकते हैं।
- दूध न पचना (Lactose intolerance)। कई लोगों का शरीर बड़ी उम्र में दूध की शक्कर नहीं पचा पाता। दूध या चाय पीते ही पेट गुड़गुड़ाए और दस्त हो जाएं, बाकी समय सब ठीक रहे, तो यह जांच कराने लायक पैटर्न है।
- तनाव और IBS। परीक्षा, इंटरव्यू या किसी बड़ी टेंशन से ठीक पहले पेट खराब होना वहम नहीं है। आंत और दिमाग का सीधा रिश्ता है। महीनों तक बार-बार ऐसा हो, कभी दस्त कभी कब्ज़ का चक्र चले, तो IBS की दिशा में सोचा जाता है।
- मौसम का असर। भारत में दस्त के मरीज़ गर्मी और बरसात में सबसे ज़्यादा बढ़ते हैं। गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है और लोग जहां-तहां का ठंडा पानी पी लेते हैं। बरसात में पीने के पानी में गंदे पानी का रिसाव आम समस्या है। इन दो मौसमों में खाने-पीने की सावधानी दोगुनी रखनी चाहिए।
किन लोगों को दस्त ज़्यादा नुकसान पहुंचाता है
दस्त सबको हो सकता है, पर सब पर बराबर भारी नहीं पड़ता। पांच साल से छोटे बच्चे सबसे संवेदनशील हैं, क्योंकि उनके छोटे शरीर से पानी की थोड़ी सी कमी भी बड़ा असर डालती है। बुज़ुर्गों में प्यास का एहसास कम हो जाता है, इसलिए वे पानी की कमी को महसूस किए बिना गंभीर स्थिति में पहुंच सकते हैं। गर्भवती महिलाओं में दस्त और पानी की कमी मां और शिशु दोनों के लिए जोखिम है। और शुगर, किडनी या दिल के मरीज़ों में दस्त शरीर के नमक-पानी का संतुलन तेज़ी से बिगाड़ देता है, जिससे उनकी मूल बीमारी भड़क सकती है। इन चार में से किसी भी समूह के व्यक्ति को दस्त हों, तो "एक-दो दिन देख लेते हैं" वाला रवैया न अपनाएं।
डायरिया के लक्षण – दस्त के साथ क्या-क्या महसूस होता है
पतला मल तो मुख्य लक्षण है ही। उसके साथ ये भी दिख सकते हैं: पेट में मरोड़ या ऐंठन। बार-बार शौच की तेज़ इच्छा। जी मिचलाना या उल्टी। हल्का बुखार। कमजोरी, थकान। भूख न लगना।
असली नज़र निर्जलीकरण पर रखनी है। उसे तीन स्तरों में समझिए।
हल्की कमी: प्यास बढ़ना, मुंह हल्का सूखना, पेशाब का रंग गहरा होना। इस स्तर पर ORS और तरल पदार्थ घर पर ही स्थिति संभाल लेते हैं।
मध्यम कमी: बहुत ज़्यादा प्यास, सूखी जीभ, धंसी आंखें, पेशाब काफी कम, उठने पर चक्कर। यह डॉक्टर को दिखाने का स्तर है, आज ही।
गंभीर कमी: सुस्ती या बेहोशी जैसी हालत, बहुत तेज़ धड़कन, पेशाब लगभग बंद, त्वचा को चुटकी में उठाने पर उसका धीरे-धीरे वापस बैठना। यह इमरजेंसी है। यहां ORS नहीं, नस से चढ़ने वाली ड्रिप चाहिए, और हर घंटे की देरी कीमती है।
दस्त का घरेलू इलाज – पहले 24 घंटे में क्या करें
अच्छी खबर: ज़्यादातर दस्त बिना किसी महंगी दवा के, घर पर सही देखभाल से ठीक हो जाते हैं। बुनियादी नियम एक ही है: जितना पानी निकल रहा है, उससे ज़्यादा वापस पहुंचाओ।
ORS – दस्त का सबसे सस्ता और सबसे असरदार इलाज
ORS को WHO "जीवन रक्षक घोल" यूं ही नहीं कहता। दुनिया भर में करोड़ों बच्चों की जान बचाने का श्रेय इस मामूली से घोल को दिया जाता है। ORS के पैकेट हर मेडिकल स्टोर और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर मिलते हैं। पैकेट पर लिखी मात्रा के साफ या उबालकर ठंडे किए पानी में पूरा पैकेट घोलें। आधा पैकेट आधे पानी में नहीं, अनुपात बिगड़ जाता है। बना हुआ घोल 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल करें, बचा हुआ फेंक दें।
पैकेट न मिले तो घर पर बना लीजिए: 1 लीटर साफ (उबालकर ठंडा किया) पानी + 6 छोटे चम्मच चीनी + आधा छोटा चम्मच नमक। अच्छी तरह घोलें। नमक की मात्रा का ध्यान रखें; घोल आंसू से ज़्यादा नमकीन नहीं लगना चाहिए। ज़्यादा नमक फायदे की जगह नुकसान करता है।
कितना पिलाना है? WHO का सामान्य पैमाना याद रखने लायक है: हर दस्त के बाद दो साल से छोटे बच्चे को करीब 50 से 100 मिली (चौथाई से आधा कप), दो से दस साल के बच्चे को 100 से 200 मिली (आधा से एक कप), और बड़े जितना पी सकें। एक साथ गिलास भरकर नहीं, चम्मच-चम्मच या घूंट-घूंट, ताकि उल्टी न हो।
ORS के अलावा नारियल पानी, नमक-चीनी की शिकंजी, छाछ, दाल का पानी और चावल का माढ़ भी पानी लौटाने में मदद करते हैं। कोल्ड ड्रिंक और डिब्बाबंद जूस नहीं। उनकी ज़्यादा चीनी आंत में पानी खींचकर दस्त बढ़ा सकती है। एनर्जी ड्रिंक भी ORS का विकल्प नहीं है, दोनों की बनावट अलग है।
दस्त में क्या खाएं
भूखा रहना समाधान नहीं है। यह पुरानी सोच अब बदल चुकी है। पेट को आराम चाहिए, हड़ताल नहीं। पहले दिन बिल्कुल हल्का: खिचड़ी, दही-चावल, केला, उबला आलू, मूंग दाल का पानी, सूखा टोस्ट। केला खासतौर पर अच्छा है क्योंकि उसमें पोटैशियम होता है, जो दस्त में शरीर से निकलता है। दस्त कम होते ही अगले एक-दो दिन में सामान्य घर का खाना धीरे-धीरे वापस शुरू करें। दही रोज़ रखें, वह पेट के अच्छे बैक्टीरिया लौटाने में मदद करता है।
दस्त में क्या न खाएं
तला-भुना और तेज़ मसालेदार खाना। दूध और भारी डेयरी कुछ दिन के लिए (दही चलेगा, वह अलग तरह से पचता है)। बाहर का खुला खाना। कच्चा सलाद कुछ दिन के लिए। चाय-कॉफी कम, शराब बिल्कुल नहीं। बहुत मीठी चीज़ें भी टालें।
तीन गलतियां जो लगभग हर घर में होती हैं
पहली: पानी बंद कर देना। "पानी पिएगा तो और दस्त होंगे" वाली सलाह घर के बड़े अक्सर देते हैं, और यह सलाह सीधी उल्टी पड़ती है। दस्त में पानी रोकना निर्जलीकरण को न्योता है। दुश्मन पानी नहीं, दूषित पानी है।
दूसरी: खुद से एंटीबायोटिक शुरू कर देना। मेडिकल स्टोर से बिना पर्ची एंटीबायोटिक लेना इस देश की पुरानी आदत है। ज़्यादातर दस्त वायरल होते हैं, जिन पर एंटीबायोटिक बेअसर है। बेवजह ली गई एंटीबायोटिक पेट के अच्छे बैक्टीरिया मारकर दस्त और लंबा खींच सकती है।
तीसरी: दस्त रोकने वाली गोली हर हाल में निगल लेना। Loperamide जैसी दवाएं दस्त की रफ्तार रोकती हैं, बीमारी ठीक नहीं करतीं। खूनी दस्त या तेज़ बुखार में ये दवाएं संक्रमण को अंदर रोककर हालत बिगाड़ सकती हैं। बच्चों को डॉक्टर की सलाह के बिना कभी नहीं। पहले सलाह, फिर दवा। क्रम उल्टा नहीं।
दस्त की दवाओं की सच्चाई – क्या काम करता है, क्या नहीं
बाज़ार में दस्त के नाम पर बहुत कुछ बिकता है। साफ तस्वीर यह है।
- ORS + आराम + सही खाना ही ज़्यादातर मामलों का पूरा इलाज है। सबसे कम कीमत, सबसे ठोस असर।
- ज़िंक (Zinc) बच्चों के दस्त में ORS का साथी है। WHO और UNICEF की मानक सलाह है कि दस्त वाले बच्चे को 10 से 14 दिन ज़िंक दिया जाए; यह दस्त की अवधि घटाता है और अगले कुछ महीनों में दोबारा दस्त का खतरा भी कम करता है। खुराक बच्चे की उम्र पर निर्भर करती है, इसलिए शुरुआत डॉक्टर की सलाह से करें।
- प्रोबायोटिक्स पेट के अच्छे बैक्टीरिया लौटाने में मदद कर सकते हैं, खासकर एंटीबायोटिक से लगे दस्त में। ये सहायक हैं, मुख्य इलाज नहीं।
- एंटीबायोटिक सिर्फ तब, जब जांच या लक्षणों के आधार पर डॉक्टर बैक्टीरिया का संक्रमण मानें। खूनी दस्त, तेज़ बुखार या जांच में निकले खास जीवाणु, ऐसे मामलों में डॉक्टर खुद लिखेंगे।
- दस्त रोकने वाली गोलियां सिर्फ बड़ों में, सिर्फ साधारण दस्त में, और सफर जैसी मजबूरी में ही समझदारी हैं। बुखार या खून के साथ कभी नहीं।
डॉक्टर के पास कब जाएं – ये संकेत नज़रअंदाज़ न करें
सीधी बात। नीचे लिखा कोई भी एक संकेत दिखे, तो इंतज़ार बंद:
- मल में खून या काला, तारकोल जैसा मल।
- तेज़ बुखार।
- बड़ों में दो दिन, बच्चों में 24 घंटे बाद भी दस्त जारी।
- निर्जलीकरण के लक्षण: चक्कर, बहुत सूखा मुंह, 6 से 8 घंटे से पेशाब नहीं।
- तेज़ पेट दर्द जो कम न हो रहा हो।
- लगातार उल्टी, जिसमें ORS भी नहीं टिक रहा।
- बुज़ुर्ग, गर्भवती, शुगर या किडनी के मरीज़ को दस्त, इनमें पहले दिन से सतर्कता चाहिए।
अस्पताल में होगा क्या, यह डर भी कई लोगों को घर बैठाए रखता है, तो वह भी जान लीजिए। डॉक्टर लक्षण और खान-पान की जानकारी लेंगे, ज़रूरत लगी तो मल और खून की सामान्य जांच होगी, और पानी की कमी ज़्यादा हुई तो ड्रिप से उसी दिन पूरी कर दी जाएगी। CBLM Holy Family Hospital की OPD में दस्त के जो मरीज़ बिगड़ी हालत में पहुंचते हैं, उनमें से ज़्यादातर की कहानी एक जैसी होती है: "सोचा ठीक हो जाएगा, तीन दिन निकल गए।" दस्त का इलाज सस्ता और सीधा है। देर ही उसे महंगा और मुश्किल बनाती है।
बच्चों में दस्त – जहां लापरवाही सबसे भारी पड़ती है
दुनिया भर में पांच साल से छोटे बच्चों की मौत की बड़ी वजहों में दस्त आज भी गिना जाता है। तकलीफ की बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर मौतें ORS जैसे सस्ते इलाज से रोकी जा सकती हैं।
छोटे बच्चों में दस्त की सबसे आम वजह रोटावायरस है। इसका टीका अब सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है, इसलिए बच्चे का टीकाकरण कार्ड पूरा रखें।
बच्चे को दस्त हों तो तीन काम, इसी क्रम में। पहला, ORS हर दस्त के बाद, ऊपर बताई मात्रा में, चम्मच से थोड़ा-थोड़ा। दूसरा, खाना-दूध बंद न करें। स्तनपान करते शिशु को स्तनपान पहले से ज़्यादा बार कराएं। बड़े बच्चे को खिचड़ी, दही-चावल, केला देते रहें। दस्त में पोषण रोकना बच्चे को दोहरा कमजोर करता है। तीसरा, डॉक्टर की सलाह से ज़िंक की खुराक 10 से 14 दिन।
खतरे के निशान, जो बच्चों में तुरंत अस्पताल का इशारा हैं:
- बच्चा सुस्त पड़ जाए या असामान्य रूप से चिड़चिड़ा हो।
- आंखें धंसी दिखें।
- रोने पर आंसू न आएं।
- जीभ सूखी हो।
- 6 घंटे से पेशाब न किया हो।
- मल में खून हो।
- या कुछ भी पिलाते ही उल्टी कर दे।
इनमें से कुछ भी दिखे, तो घरेलू इलाज का समय उसी पल खत्म हो चुका है।
गर्भावस्था और बुज़ुर्गों में दस्त – दो स्थितियां, दोगुनी सावधानी
गर्भवती महिला को दस्त हों तो खुद से कोई भी दवा न लें, दस्त रोकने वाली गोली भी नहीं। ORS और तरल पदार्थ तुरंत शुरू करें और एक दिन से ज़्यादा चलने पर, या पेट दर्द-बुखार साथ होने पर, अपनी डॉक्टर से बात करें। पानी की कमी गर्भ के लिए सीधा जोखिम है, इसलिए यहां "देख लेते हैं" की गुंजाइश सबसे कम है।
बुज़ुर्गों में दिक्कत दूसरी है। उम्र के साथ प्यास का एहसास घट जाता है, इसलिए शरीर सूखता रहता है और पता भी नहीं चलता। घर में किसी बुज़ुर्ग को दस्त हों तो उनकी प्यास पर नहीं, घड़ी पर चलें: हर आधे-एक घंटे में ORS या तरल देते रहें, पेशाब की मात्रा पर नज़र रखें, और उनकी नियमित दवाओं (खासकर BP और शुगर की) के बारे में डॉक्टर से एक बार सलाह ले लें, क्योंकि पानी की कमी में कुछ दवाओं का असर बदल जाता है।
दस्त ठीक होने के बाद – पेट को वापस पटरी पर कैसे लाएं
दस्त रुक गया, कहानी खत्म नहीं हुई। आंत को पूरी तरह संभलने में कुछ दिन लगते हैं। इन दिनों में तीन काम करें। खाना धीरे-धीरे सामान्य करें, पहले दिन से ही तला-मसालेदार न शुरू कर दें। दही या छाछ रोज़ लें, पेट के अच्छे बैक्टीरिया की वापसी के लिए। और पानी पीना उसी रफ्तार से जारी रखें, क्योंकि शरीर की भरपाई दस्त रुकने के बाद भी चलती रहती है। बच्चों में दस्त के बाद के दो हफ्ते खाने-पोषण के लिहाज़ से खास हैं; इस दौरान एक समय का खाना बढ़ा दें ताकि बीमारी में गया वज़न लौट आए।
दस्त से बचाव – पांच आदतें जो सच में काम करती हैं
- खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना। सुनने में सबसे बेसिक, असर में सबसे बड़ा।
- पीने का पानी साफ रखना: उबालकर, फिल्टर करके या ढककर।
- बासी और खुले में रखा खाना न खाना, खासकर गर्मी और बरसात में।
- फल-सब्ज़ी धोकर इस्तेमाल करना, और कटे हुए खुले फल बाहर से न लेना।
- बच्चों का टीकाकरण समय पर पूरा कराना, जिसमें रोटावायरस का टीका शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Loose motion और diarrhea में क्या फर्क है?
कोई फर्क नहीं। Loose motion बोलचाल का शब्द है, diarrhea मेडिकल शब्द। दोनों का हिंदी मतलब दस्त ही है।
दस्त कितने दिन में ठीक होते हैं?
साधारण दस्त आमतौर पर 2 से 3 दिन में ठीक होने लगते हैं। दो दिन से ज़्यादा चलें, या साथ में बुखार या खून हो, तो डॉक्टर से मिलें। 14 दिन से ज़्यादा चलने वाला दस्त हर हाल में जांच मांगता है।
दस्त में केला खाना चाहिए या नहीं?
खाना चाहिए। केला पेट के लिए हल्का है और उसमें पोटैशियम होता है, जो दस्त में शरीर से निकल जाता है। पका केला ही लें।
क्या दस्त में दूध पीना बंद कर दें?
कुछ दिन के लिए हां, दूध और भारी डेयरी से परहेज़ बेहतर है, क्योंकि दस्त के दौरान दूध पचाना मुश्किल हो जाता है। दही और छाछ ले सकते हैं। मां का दूध पीते शिशु के लिए नियम उल्टा है: स्तनपान बिल्कुल बंद न करें, बल्कि बढ़ा दें।
ORS दिन में कितनी बार दे सकते हैं?
हर पतले दस्त के बाद। ORS दवा नहीं, शरीर के पानी-नमक की भरपाई है, इसलिए इसकी "खुराकें" गिनने की ज़रूरत नहीं। बस एक बार में ढेर सारा न पिलाएं; थोड़ा-थोड़ा, बार-बार।
घर का बना ORS बेहतर है या पैकेट वाला?
पैकेट वाला। उसमें नमक, चीनी और ज़रूरी लवणों का अनुपात बिल्कुल नपा-तुला होता है। घर का नुस्खा (1 लीटर पानी, 6 चम्मच चीनी, आधा चम्मच नमक) तब के लिए है जब पैकेट उपलब्ध न हो।
दस्त में चाय पी सकते हैं?
एक-दो कप हल्की चाय से आमतौर पर नुकसान नहीं, पर चाय पानी की भरपाई नहीं करती। चाय के भरोसे न रहें, ORS और सादा पानी ही मुख्य सहारा रखें। बहुत कड़क चाय और कॉफी टालें।
दस्त और उल्टी दोनों साथ हों तो क्या करें?
घूंट-घूंट ORS जारी रखें; उल्टी के तुरंत बाद 5-10 मिनट रुककर फिर चम्मच-चम्मच शुरू करें। कुछ भी अंदर न टिक रहा हो और यह सिलसिला कुछ घंटों से ज़्यादा चले, तो ड्रिप की ज़रूरत पड़ सकती है। अस्पताल पहुंचें।
क्या हर दस्त में एंटीबायोटिक ज़रूरी है?
नहीं। ज़्यादातर दस्त वायरल होते हैं, जिन पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती। एंटीबायोटिक की ज़रूरत है या नहीं, यह फैसला जांच के बाद डॉक्टर का है, मेडिकल स्टोर वाले भाई साहब का नहीं।
Diarrhea को पंजाबी में क्या कहते हैं?
पंजाबी में भी इसे ਦਸਤ (दस्त) ही कहते हैं। हिंदी और पंजाबी में यह शब्द साझा है।